ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) के म्यूजियम को हाल ही में दोबारा खोला गया था। जब छात्र वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बांग्लादेश की आजादी के महानायक शेख मुजीबुर रहमान की मुख्य भूमिका दर्शाने वाली तस्वीरें गायब थीं। उनकी जगह 1971 से 1975 वाले सेक्शन में केवल उनके बेटों की शादी और कुछ अखबारों की कतरनें थीं। इसके विपरीत, म्यूजियम में मोहम्मद अली जिन्ना की तीन तस्वीरें प्रमुखता से लगा दी गईं, जिसमें जिन्ना का वह 1948 का भाषण भी शामिल था जिसमें उन्होंने उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राष्ट्रभाषा घोषित किया था।,
किसने किया यह बदलाव?
यह बदलाव छात्र संगठन 'इस्लामी छात्र शिबिर' के प्रभाव वाले DUCSU प्रशासन द्वारा किया गया। छात्र शिबिर कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा है। दरअसल, पिछले छात्र संघ चुनावों में इस धड़े का प्रभाव बढ़ा है। DUCSU के पदाधिकारियों का तर्क है कि वे इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि केवल "ऐतिहासिक संदर्भ" प्रदान कर रहे हैं।
छात्रों का उग्र विरोध और जिन्ना की फोटो फाड़ना
सोमवार, 14 सितंबर को 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ बांग्लादेश' के सदस्य मुहम्मद अबू तैयब की अगुवाई में छात्रों का एक समूह जबरन म्यूजियम में दाखिल हुआ। उन्होंने जिन्ना की तस्वीरों के फ्रेम तोड़ दिए और फोटो को फाड़कर फेंक दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि छात्रों ने विरोध स्वरूप उसी जगह पर जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख और 1971 के युद्ध अपराधों के दोषी गुलाम आजम की एक विवादास्पद तस्वीर लगा दी, जिसमें वे जूतों से पिटते हुए दिखाई दे रहे हैं। जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने का बांग्लादेश के वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष छात्र संगठनों ने तीखा विरोध किया।
· शिक्षकों और बुद्धिजीवियों की चिंता
ढाका यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के नेटवर्क ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि शेख मुजीबुर रहमान जैसे केंद्रीय राजनेता की तस्वीर हटाना इतिहास को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तानी सेना और उनके स्थानीय सहयोगियों (रजाकारों) द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर में की गई शिक्षकों और छात्रों की हत्याओं के इतिहास को किसी धार्मिक या राजनीतिक एजेंडे के लिए मिटाया नहीं जा सकता।
क्या है बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति?
बांग्लादेश में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद से ही इतिहास को नए सिरे से लिखने और शेख हसीना के पिता मुजीबुर रहमान की विरासत को कमजोर करने की कोशिशें लगातार देखी जा रही हैं। जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी ताकतें देश में अपना प्रभाव बढ़ा रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान सरकार के दौर में पाकिस्तान समर्थक और मुजीब-विरोधी तत्वों को बढ़ावा मिल रहा है, जिसके कारण देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और इतिहास को बदलने की कोशिशें हो रही हैं।
फिलहाल, इस भारी विवाद के बाद ढाका यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि म्यूजियम के ऐतिहासिक कलेक्शन में ये अनधिकृत बदलाव किसने और क्यों किए
