देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र सिंह डोबाल के निर्देश पर गठित SIT (जिसका नेतृत्व एसपी देहात जया बलोनी कर रही हैं) ने मंगलवार को इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था:
रूपेश पंडित (मास्टरमाइंड) मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और पिछले 5 सालों से मेरठ (उत्तर प्रदेश) की द्वारिकापुरी कॉलोनी में 'मिकोडो पाठशाला' नाम से एक एजुकेशन कंसल्टेंसी फर्म चला रहा था। यहीं से बैठकर वह इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था। अरविंद कुमार उत्तराखंड के लक्सर (हरिद्वार) के बहादरपुर खादर गांव का निवासी है और नीट परीक्षा देने वाली एक अभ्यर्थी का पिता है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। इसके साथ ही भोपाल से जुड़े एक अन्य एजेंट को भी जांच के दायरे में लेकर गिरफ्तार किया गया है।
SIT की पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ऐसे छात्रों और उनके परिजनों को निशाना बनाते थे जिनके नीट (NEET) में कम नंबर आते थे या जिन्हें मनपसंद मेडिकल कॉलेज नहीं मिल पा रहा था। मास्टरमाइंड रूपेश पंडित ने एक अभ्यर्थी को सरकारी कोटे की सीट दिलाने के लिए 45-45 लाख रुपये का सौदा तय किया था।
आरोपी पिता अरविंद कुमार समेत तीन अन्य अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस के तौर पर लिए गए थे, पुलिस ने आरोपियों के पास से अब तक लाखों रुपये कैश और कूट रचित दस्तावेज बरामद किए हैं।
एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर बना डाले कई फर्जी सर्टिफिकेट
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपियों ने एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (धर्मवीर) के नाम का इस्तेमाल करके चार अलग-अलग अभ्यर्थियों के फर्जी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कर दिए। सभी में अभ्यर्थियों को सेनानी का पोता-पोती या आश्रित दर्शाया गया था, जबकि हकीकत में उस स्वतंत्रता सेनानी के असली परिवार ने कभी इस आरक्षण के लिए आवेदन ही नहीं किया था। जब 'अपनी सरकार' पोर्टल पर दिए गए पतों और मेडिकल कॉलेजों में जमा दस्तावेजों के पतों का मिलान किया गया, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए।
दो लेखपाल (राजस्व निरीक्षक) सस्पेंड
बिना सही भौतिक सत्यापन किए और बिना जरूरी दस्तावेजों (जैसे स्थाई निवास, पेंशन प्रमाण पत्र आदि) की जांच किए लापरवाही से ऑनलाइन रिपोर्ट फॉरवर्ड करने के आरोप में देहरादून प्रशासन ने दो लेखपालों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। निलंबित किए गए इन कर्मचारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच बैठा दी गई है और अपर जिला मजिस्ट्रेट को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
चार छात्राओं का एडमिशन रद्द, एफआईआर दर्ज
इस फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कड़ा एक्शन लेते हुए चारों आरोपी छात्राओं का एमबीबीएस (MBBS) दाखिला तुरंत निरस्त कर दिया है। इसके अलावा, देहरादून के क्लेमनटाउन और रायपुर थानों में संबंधित अभ्यर्थियों और संलिप्त लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व कूटरचना की धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
आगे की कार्रवाई और बढ़ता जांच का दायरा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख के बाद, उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सभी 10 सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को काउंसलिंग के दौरान जमा हुए सभी दस्तावेजों की दोबारा गहनता से री-वेरिफिकेशन करने के आदेश दिए हैं। SIT अब कॉमन सर्विस सेंटर्स ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के दुरुपयोग और तहसील के अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। इस रैकेट में करीब 12 से अधिक अन्य संदिग्घ लोग पुलिस के रडार पर हैं, जिनकी जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।
