यह नई व्यवस्था केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के नियम 167-ख के तहत लागू की गई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार 'नेक्स्ट जेन ई-चालान मोबाइल ऐप और पोर्टल' के माध्यम से इसे पूरे प्रदेश में प्रभावी कर दिया गया है।
कोर्ट जाने के लिए 50% राशि जरूरी
यदि किसी वाहन स्वामी को लगता है कि उसका चालान गलत कटा है और वह इसे कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर 50% चालान राशि का अग्रिम भुगतान करना होगा। इस राशि को जमा किए बिना अदालत में मामले की सुनवाई या चुनौती की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकेगी।
90 दिनों की अंतिम समय-सीमा (गाड़ी होगी सीज)
चालान कटने के बाद वाहन स्वामी को उसे भुगतने के लिए अधिकतम 90 दिन का समय मिलेगा। यदि इस अवधि के भीतर चालान की रकम जमा नहीं की जाती है, तो उस वाहन को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा। इसके बाद वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट, ट्रांसफर (आरसी ट्रांसफर), बीमा (इंश्योरेंस) और अन्य सभी जरूरी आधिकारिक कार्य पूरी तरह से रोक (सीज) दिए जाएंगे।
चालान पर आपत्ति और अपील की व्यवस्था
परिवहन विभाग ने चालान से जुड़ी शिकायतों के लिए एक व्यवस्थित समय-सारणी (टाइमलाइन) तय की हैI यदि वाहन स्वामी चालान की कार्रवाई से सहमत नहीं है, तो वह चालान कटने के 45 दिनों के भीतर ई-चालान पोर्टल पर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकता है। संबंधित अधिकारी को आपत्ति मिलने के 30 दिनों के भीतर उसका निस्तारण (समाधान) करना होगा। यदि अधिकारी इस समय-सीमा में शिकायत का निपटारा नहीं करता है, तो वह चालान स्वतः ही खत्म मान लिया जाएगा। अगर वाहन स्वामी अधिकारी के फैसले से असंतुष्ट है, तो वह अगले 30 दिनों के भीतर अपील भी दाखिल कर सकता है। चालान मिलने के 75 दिन बाद उसे कोर्ट में चुनौती देने की व्यवस्था की गई है।
किसी भी जिले में दर्ज कराएं शिकायत
वाहन स्वामियों की सुविधा के लिए परिवहन विभाग ने सबसे बड़ी राहत यह दी है कि अब चालान की शिकायत दर्ज कराने के लिए उस जिले में जाने की बाध्यता नहीं है जहाँ चालान कटा है। उदाहरण के लिए, यदि आपका चालान लखनऊ में कटा है, तो आप वाराणसी या उत्तर प्रदेश के किसी भी अन्य जिले से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
रैंडम व्यवस्था से होगा निपटारा
आरटीओ (RTO) प्रशासन के मुताबिक, नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने आपत्तियों के निस्तारण के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। इसके तहत किसी एक जिले में दर्ज हुई शिकायत का निपटारा पूरी तरह रैंडम प्रणाली से किसी भी दूसरे जिले के अधिकारी को भेजकर कराया जा सकता है। इस व्यवस्था के लिए उप परिवहन आयुक्त, संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO) और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) को शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
