चार्जशीट का आकार और जांच का दायरा
पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और स्थानीय पुलिस ने मिलकर 73 हजार 480 पन्नों की विशालकाय चार्जशीट विशेष भ्रष्टाचार निवारण (एंटी करप्शन) कोर्ट में दाखिल की है। इसमें 101 विवेचना पर्चे शामिल हैं, जो जांच की गहराई को दर्शाते हैं। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से फॉरेंसिक लैब की मदद से 3,300 से अधिक डिलीट किए जा चुके टेक्स्ट और व्हाट्सएप मैसेजेस को रिकवर किया है। इन मैसेजेस में पैसों के बंटवारे और चोरी की प्लानिंग का पूरा ब्योरा दर्ज है। इसके अलावा, पुलिस 5 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों की स्क्रूटनी कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे हाई-टेक कैमरों की फुटेज खंगालने पर पुलिस की आंखें फटी की फटी रह गईं। आरोपियों ने कोई एक या दो बार हाथ साफ़ नहीं किया था, बल्कि कैमरे की नजर में कुल 105 बार चढ़ावा चोरी करने की वारदातें कैद हुईं। आरोपियों के खिलाफ केस को अकाट्य (नाकाबिले-तारीद) बनाने के लिए पुलिस ने 173 लोगों को गवाह बनाया है, जिसमें से 133 अभियोजन के मुख्य गवाह हैं।
इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पूरी तरह से क्लीन चिट दी गई है। जांच में सामने आया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों या बैंक के मुख्य कर्मियों की इस सुनियोजित चोरी में कोई भूमिका नहीं थीI पुलिस ने कानूनी रणनीति के तहत पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और व्यवस्था प्रमुख गोपाल राव को आरोपी न बनाकर सरकारी गवाह बनाया है, ताकि कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ गवाही को और मजबूत किया जा सकेI
मास्टरमाइंड, आरोपी और बरामदगी का पूरा ब्योरा
इस चोरी में शामिल मुख्य किरदारों और उनके पास से हुई सनसनीखेज बरामदगी का विवरण इस प्रकार है:
1. अनुकल्प मिश्र (मुख्य साजिशकर्ता) : इसे पूरी वारदात का 'मास्टरमाइंड' बताया गया है। इसके पास से सबसे बड़ी रकम यानी 16.82 लाख रुपये की नगदी बरामद हुई है।
2. रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू (ड्राइवर) : यह चंपत राय का निजी चालक था। इसके पास बिना किसी आधिकारिक आदेश के दानपात्रों (डोनेशन बॉक्स) की चाबियां रहती थीं, जिसका फायदा उठाकर यह चोरी को अंजाम देता था।
3. लवकुश मिश्र (बहनोई) : टिन्नू ने इसे भी मंदिर में काम पर रखवाया था। इसके पास से 14.25 लाख रुपये मिले हैं।
4. अविनाश शुक्ला : इसके पास से भारतीय करेंसी के अलावा विदेशी मुद्रा भी मिली। पुलिस ने इसके घर से 20.39 लाख रुपये, 1121 अमेरिकी डॉलर और सोने के आभूषण बरामद किए हैं。
5. करुणेश पांडेय : दान की रकम की गिनती के दौरान हेराफेरी करता था। इसके पास से 18.07 लाख रुपये की बरामदगी हुई है।
6. रमाशंकर मिश्र : इसके पास से 7.32 लाख रुपये की नगदी, चांदी का बिछुआ और चांदी के दो सिक्के बरामद हुए हैं।
7. मनीष यादव : नगदी की गिनती के समय पैसे उड़ाने का काम करता था। इसके पास से 2 लाख रुपये बरामद हुए हैं।
8. सुभाष श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त बैंककर्मी) : नगदी की गिनती के दौरान चोरी की रकम को छिपाने और प्रबंधित करने में मदद करने का आरोप है।
कौन सी धारा में क्या है कानूनी शिकंजा?
कानूनी विशेषज्ञों के पैनल के अनुसार, आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद सख्त और गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैंI
धारा 316(5) - आपराधिक न्यासभंग (Criminal Breach of Trust) - चूंकि आरोपियों को मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे की सुरक्षा व गिनती का जिम्मा सौंपा गया था और उन्होंने उसी भरोसे को तोड़ा, इसलिए यह सबसे गंभीर धारा लगाई गई है। इसमें आजीवन कारावास (उम्रकैद) या 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 317(4) और 317(5) - चोरी का माल छिपाना: चोरी की गई संपत्ति, नगदी और विदेशी मुद्रा को जानबूझकर अपने पास रखने और छिपाने के जुर्म में 3 से 7 वर्ष तक की जेल हो सकती है।
धारा 61 और 3(5) - आपराधिक साजिश और साझा मंशा: सामूहिक रूप से मिलकर साजिश रचने के कारण कोर्ट में सभी 8 आरोपियों को इस अपराध के लिए समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
