यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने सूरज सिंह बिसेन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।
· जल निकासी के लिए बने समग्र योजना : कोर्ट ने शहर में जलभराव की समस्या पर चिंता जताते हुए प्रशासन से पूछा कि क्या जल निकासी के लिए कोई व्यापक मास्टर प्लान मौजूद है? यदि ऐसा कोई प्लान नहीं है, तो कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी विशेषज्ञ संस्था की मदद लेकर तुरंत एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए और उसे लागू किया जाए।
· ई-रिक्शा के लिए तय हों रूट : शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए हाई कोर्ट ने ई-रिक्शा के संचालन को नियमित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा के चलने के लिए विशिष्ट मार्ग (रूट) तय किए जाएं। इस पर राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि कुछ मुख्य मार्गों पर इनके संचालन को सीमित करने और नए परमिट जारी करने पर नियंत्रण लगाने के उपायों पर केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार है।
· शहीद पथ यातायात को सुगम बनाने की योजना : कमता चौराहा, पॉलिटेक्निक चौराहा और शहीद पथ से आने वाले भारी ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए कोर्ट ने दीर्घकालीन योजनाओं की जानकारी मांगी है। इसके साथ ही शहीद पथ को चिनहट की तरफ जाने वाली सड़क से जोड़ने के लिए अंडरपास बनाने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा गया है। कोर्ट ने जमीन की उपलब्धता और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अगली सुनवाई तक इसकी व्यवहार्यता रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
· अतिक्रमण पर दोबारा सख्ती : शहर में हटाए गए अतिक्रमण के फिर से काबिज होने की शिकायतों पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि एक बार अतिक्रमण हटा दिया जाए और वह दोबारा होता है, तो स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचित कर आपराधिक कार्रवाई सहित सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।
· कमर्शियल बिल्डिंग्स में बेसमेंट पार्किंग अनिवार्य हो: व्यावसायिक इमारतों के बेसमेंट में पार्किंग की जगह होने के बावजूद गाड़ियों को सड़क पर खड़ा कराए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने एलडीए और संबंधित विभागों से सवाल किया कि वे बेसमेंट पार्किंग का अनिवार्य उपयोग कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं?
कमेटी की रिपोर्ट और अगली सुनवाई :
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि यातायात सुधार के लिए गठित समिति हर हफ्ते बैठक कर रही है और नगर निगम उसकी सिफारिशों का पालन कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पुलिस यातायात, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
