मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि "विकसित भारत का सपना, विकसित उत्तर प्रदेश से और विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य आत्मनिर्भर एवं विकसित ग्राम पंचायतों से ही पूरा होगा।" उनका मानना है कि जब तक हमारे गाँव आत्मनिर्भर नहीं बनेंगे, तब तक प्रदेश या देश के विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने नए अधिकारियों को याद दिलाया कि उनकी भूमिका इस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे अहम है।
मुख्यमंत्री ने सभी नए ग्राम पंचायत अधिकारियों को गाँव के विकास के लिए जी-जान से जुटने की सलाह दी। उन्होंने इन अधिकारियों को मुख्य रूप से तीन बड़ी ज़िम्मेदारियाँ सौंपीं: अधिकारी सरकार की नीतियों और ग्रामीण जनता के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करें। हर एक पात्र और ज़रूरतमंद व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुँचना चाहिए। ग्राम पंचायतों की अपनी आय (Revenue) बढ़ाने के साधन ढूंढे जाएं और गाँवों को विकास के एक नए मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने एक बेहद संवेदनशील बात कही कि नियुक्ति केवल एक व्यक्ति के लिए रोज़गार का अवसर नहीं होती, बल्कि यह पूरे परिवार के जीवन में एक नई उम्मीद, सुरक्षा और आत्मविश्वास लेकर आती है। एक युवा को नौकरी मिलने से पूरा परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध होता है।
रोजगार के आंकड़े और भविष्य का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान रोज़गार देने के आंकड़ों को भी सामने रखा:I राज्य में अब तक 9 लाख 50 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले 6 महीनों के भीतर 1 लाख और युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि पारदर्शी तरीके से नियुक्तियों का यह सिलसिला आगे भी लगातार जारी रहेगा।
