जांच का दायरा और कारण
ईडी की लखनऊ इकाई ने नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग से इन परियोजनाओं से जुड़ा पूरा ब्योरा मांगा है। जांच का मुख्य फोकस उन पानी की टंकियों पर है जो निर्माण के बाद ही क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनमें रिसाव हो रहा है या जिन्हें असुरक्षित घोषित किया गया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ईडी के सहायक निदेशक ने 27 अगस्त को यूपी जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक (एमडी) को एक पत्र भेजकर पूरा रिकॉर्ड मांगा था । यह पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की पड़ताल कर रही है:
- अब तक कंपनियों को आवंटित कुल राशि, एग्रीमेंट वैल्यू और किए गए वास्तविक भुगतान का विवरण।
- पानी की टंकियों की गुणवत्ता जांच, ढांचागत मजबूती (स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी) और रिसाव संबंधी रिपोर्ट।
- थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और गुणवत्ता ऑडिट की रिपोर्ट।
ईडी के रडार पर आईं ये 13 कंपनियां
ईडी ने जिन 13 कंपनियों और संस्थाओं के टेंडर, अनुबंध और भुगतान से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं : मेसर्स इओन एक्सचेंज (इंडिया) लिमिटेड, नोएडा, मेसर्स ब्रिलियंट ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद, मेसर्स स्टार कंस्ट्रक्शन, ग्रेटर नोएडा, मेसर्स अपरेंट टेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली, मेसर्स ऑरा लाइफ इंफ्रास्ट्रक्चर एसोसिएशन, मानसा, मेसर्स पैंथर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ, मेसर्स स्वास्तिक संस्थान लिमिटेड, लखनऊ , मेसर्स क्वालिटी कंस्ट्रक्शन, लखनऊ, मेसर्स रूरल डेवलपमेंट एंड इलेक्ट्रॉनिक्स ऑफिस, मोदी ग्राम सोसाइटी, लखनऊ , मेसर्स फाल्कन फाउंडेशन, लखनऊ , मेसर्स फाल्कन मुंबई , मेसर्स प्रसाद मेमोरियल रिसर्च एंड एजुकेशनल ट्रस्ट, महाराजगंज, मेसर्स फाल्कन प्रोजेक्ट्स
ईडी ने कंपनियों के वित्तीय और तकनीकी दस्तावेजों के अलावा, सबसे महत्वपूर्ण रूप से उन अधिकारियों और इंजीनियरों के नाम और पद भी मांगे हैं, जिन्होंने इन क्षतिग्रस्त और गुणवत्ताविहीन टंकियों की जांच की थी और उन्हें पास करके भुगतान की मंजूरी दी थी।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस बीच, पूर्व आईपीएस अधिकारी और अधिकार सेना के नेता अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने ईडी की इस जांच का हवाला देते हुए मांग की है कि टंकियों के निर्माण में हुए इस भारी नुकसान और भ्रष्टाचार की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
