पाँच साल में खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य
प्रारंभिक जांच में जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार सुधाकर सिंह ने 2022 से सरकारी सेवा के केवल 5 वर्षों के भीतर ही करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित कर ली। उनके रहन-सहन और ठाट-बाट किसी बड़े उद्योगपति जैसे थेI उनके पास फॉर्च्यूनर (Fortuner) जैसी कई बेहद महंगी और लक्जरी गाड़ियाँ हैं। जांच में कई आलीशान फ्लैटों और जमीनों (प्लॉट) में निवेश किए जाने की पुख्ता जानकारी मिली है।
अब विजिलेंस कसेगी शिकंजा: आय, बैंक खातों और संपत्तियों का होगा पोस्टमार्टम
घूस कांड में रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद अब उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का नया शिकंजा कसा जा रहा है। सतर्कता अधिष्ठान अब गहराई से जांच करेगा:I सुधाकर सिंह की वैध स्रोतों से होने वाली वास्तविक आय कितनी थी, और उन्होंने विभिन्न संपत्तियों व निवेशों में कितना पैसा लगाया, इसका पूरा मिलान किया जाएगा। उनके और उनके परिजनों के नाम मौजूद सभी बैंक खातों, लॉकरों, अचल संपत्तियों और गुप्त निवेशों को खंगाला जाएगा।
विजिलेंस इस पूरी अवैध संपत्ति और काली कमाई का सटीक ब्योरा जुटाकर भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को सौंपेगी ताकि आगे की विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जा सके।
पुराना रिकॉर्ड भी दागदार: चित्रकूट में अवैध खनन को बढ़ावा देने का आरोप
सुधाकर सिंह का विवादों और भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। शामली में तैनाती से ठीक पहले वह चित्रकूट में जिला खनिज अधिकारी के पद पर तैनात थे। चित्रकूट में उनके कार्यकाल के दौरान के कारनामे भी अब जांच के दायरे में हैं: उन पर आरोप है कि चित्रकूट में तैनाती के दौरान उन्होंने निर्धारित मानकों से कहीं अधिक अवैध खनन (Illegal Mining) होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की और शिकायतकर्ताओं की आवाज़ को दबाया। नियमों को ताक पर रखकर भरतकूप क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध खनन कराने और रिश्वतखोरी की शिकायतों के बाद, शिकायतकर्ताओं ने उनके खिलाफ सीधे अदालत (Court) का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन खान निरीक्षक समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
निष्कर्ष:
एक अदने से सरकारी पद पर बैठकर महज 5 साल में फॉर्च्यूनर और करोड़ों के फ्लैटों के मालिक बने सुधाकर सिंह की इस कहानी ने खनन विभाग में फैले भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विजिलेंस की इस सख्त कार्रवाई से साफ है कि अब उनके पास अपनी इस 'काली कमाई' का हिसाब देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
