प्रवर्तन निदेशालय का बड़ा हंटर : अगस्त 2019 से अब तक का पूरा हिसाब तलब
ED ने अगस्त 2019 से लेकर अब तक जल योजना में खराब हुई टंकियों की मंजूरी से लेकर भुगतान तक का पूरा कच्चा चिट्ठा (हिसाब) मांग लिया है। इस समय अवधि के दौरान जल निगम और वर्ष 2021 के बाद जल निगम (ग्रामीण) में तैनात रहे करीब आधा दर्जन आईएएस (IAS) अधिकारियों के कार्यकाल के कार्यों को भी इस जांच के दायरे में लाया गया है। प्रत्येक टंकी की स्वीकृति से लेकर आखिरी भुगतान तक का विवरण जुटाने के लिए ED ने 20 कॉलम का एक विस्तृत प्रारूप जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक को भेजा है। हालांकि, जल निगम के अधिकारियों में इस हलचल के बीच अभी तक यह ब्योरा ED को नहीं भेजा गया है।
ED ने पूछे ये तीखे सवाल
ED के उपनिदेशक ने विभाग से सीधे तौर पर पूछा है कि भुगतान जारी करने से पहले पानी की टंकी की संरचनात्मक अखंडता का सत्यापन किसने किया था? इसके लिए जिम्मेदार JE, AE और अधिशासी अभियंता के नाम और पदनाम क्या हैं? जल जीवन मिशन के पोर्टल पर अपलोड की गई प्रगति और पूर्णता की वे तस्वीरें भी मांगी गई हैं, जिनके आधार पर भुगतान जारी किया गया था।
तकनीकी दस्तावेजों और विवरणों की होगी जांच
ED ने साफ किया है कि गड़बड़ी वाली टंकियों के मामले में प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति, निविदा, डीपीआर और स्वीकृत संरचनात्मक डिजाइन व ड्राइंग देनी होगी। इसके अलावा निम्नलिखित दस्तावेज भी मांगे गए हैंI कार्यादेश पाने वाली फर्म का नाम-पता, पंजीकरण, अनुबंध मूल्य, वास्तविक पूर्णता तिथि, संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र, मृदा (मिट्टी) परीक्षण रिपोर्ट और मिक्स डिजाइन रिपोर्ट। तृतीय पक्ष निरीक्षण एजेंसी की रिपोर्ट, गुणवत्ता ऑडिट लाग और सीमेंट, एग्रीगेट व प्रबलन इस्पात (Steel) की सामग्री परीक्षण रिपोर्ट। भुगतान की जांच के लिए रनिंग अकाउंट बिल, अंतिम बिल के साथ ठेकेदार, उपठेकेदार और TPI एजेंसी के बैंक खातों का विवरण (खाता संख्या, बैंक, शाखा सहित) तलब किया गया है।
लापरवाही और भ्रष्टाचार पर होगी कड़ी कार्रवाई
टंकी के विफल होने (जैसे- परीक्षण या उपयोग के दौरान गिर जाना, फट जाना, दरार आना, रिसाव होना, झुक जाना या धंस जाना) पर की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया है I संबंधित अभियंताओं, ठेकेदारों और टीपीआई एजेंसियों के विरुद्ध निलंबन, कारण बताओ नोटिस और उन्हें ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है। लापरवाही या भ्रष्टाचार से जुड़ी दर्ज की गई एफआईआर (FIR), जांच रिपोर्ट, अनुमानित वित्तीय नुकसान और दोषियों से की जाने वाली वसूली (रिकवरी) की वर्तमान स्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष:
जल जीवन मिशन में वर्ष 2021 में हुए ग्रामीण-नगरीय विभाजन के बाद, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 54 के तहत मांगी गई इस जानकारी ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है। ED की इस कार्रवाई से साफ है कि जनता के पैसे की बर्बादी करने वाले इंजीनियरों और ठेकेदारों से अब पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा।
