ईरान ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा था कि वह 7 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और युद्ध रोकने के लिए तैयार है। इसके बदले ईरान ने शर्त रखी थी कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटाए, तेल प्रतिबंधों में ढील दे और लेबनान-यमन सहित क्षेत्रीय युद्धविराम लागू करे। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, "मैं इस समझौते को पूरी तरह खारिज करता हूं।" उन्होंने दावा किया कि ईरान यह प्रस्ताव सिर्फ इसलिए दे रहा है क्योंकि युद्ध में उसकी बुरी तरह हार हो रही है और वह गंभीर संकट में है। ट्रंप का कहना है कि जलडमरूमध्य पर पहले से ही अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और कल रात भी वहां से रिकॉर्ड मात्रा में अमेरिकी तेल निकाला गया है।
मुख्य मुद्दा: क्या कहा राष्ट्रपति ट्रंप ने?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Fox News और मरीन वन (विमान) पर सवार होने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा: "जैसे ही ईरान घुटने टेक देगा और यह युद्ध समाप्त होगा (जो कि बहुत जल्द होने वाला है), वैसे ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से नीचे गिरेंगी।"ट्रंप का मानना है कि ईरान आर्थिक नाकेबंदी और सैन्य दबाव के आगे बहुत जल्द बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को मजबूर होगा।
तेल की कीमतों पर क्या होगा असर?
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं और ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है। ट्रंप ने वादा किया है कि जैसे ही यह युद्ध खत्म होगा, तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और अमेरिकी बाजारों में पेट्रोल (Gasoline) की कीमतें $2 प्रति गैलन से भी नीचे आ जाएंगी। ट्रंप द्वारा ईरान का प्रस्ताव खारिज करने की खबर आते ही आज सुबह एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में 1% से अधिक का उछाल देखा गया है, क्योंकि तेल सप्लाई सुचारू होने की उम्मीदों को झटका लगा है।
पर्दे के पीछे की रणनीति: दोबारा बमबारी की तैयारी?
भले ही ट्रंप सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि युद्ध 'बहुत जल्द' खत्म हो जाएगा, लेकिन अंदरूनी सूत्र कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैंI The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को ईरान की नीयत पर भरोसा नहीं है और उन्होंने अपने करीबियों को संकेत दिए हैं कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों के तुरंत बाद वे ईरान पर एक बार फिर से भारी बमबारी अभियान शुरू कर सकते हैं। वाशिंगटन का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है, और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
ईरान का रुख
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के बयानों को विरोधाभासी बताया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे झुकेंगे नहीं और कोई भी समाधान केवल बातचीत और उनकी शर्तों को माने जाने के बाद ही संभव होगा। फिलहाल दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत के दरवाजे खुले हुए हैं।
