नेपाल का आग्रह और चिंता
नेपाल के कैलाली जिले में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इस वजह से वहां के निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति को बिगड़ता देख नेपाल के धनगढ़ी स्थित जिला प्रशासन ने भारत में लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।
नेपाल के मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) हृदयराज रेग्मी द्वारा 25 सितंबर को भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि भारी वर्षा के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति बहुत गंभीर है। इसलिए, कर्णाली नदी के तटीय क्षेत्रों में संभावित खतरे और पानी के दबाव को कम करने के लिए कैलाशपुर बांध के गेट खोलना बेहद जरूरी है। पत्र के माध्यम से नेपाल ने लखीमपुर खीरी प्रशासन से संबंधित अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक निर्देश देने की अपील की है।
भारत का रुख और जरूरत
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि उन्हें नेपाल प्रशासन का पत्र प्राप्त हो चुका है। हालांकि, भारत की सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल बांध के गेट खोलने की अनुमति नहीं दी गई है।
भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी जरूरत अपने सीमावर्ती इलाकों और नागरिकों को बाढ़ की विभीषिका से बचाना है। यदि बिना सोचे-समझे या बिना पूरी तैयारी के कैलाशपुर बांध के गेट खोले जाते हैं, तो नेपाल का पानी भारतीय सीमा में घुस जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और आस-पास के मैदानी इलाकों के गांवों में अचानक बाढ़ आ सकती है, जिससे जान-माल, फसलों और मवेशियों को भारी नुकसान हो सकता है।
निष्कर्ष
नेपाल जहां अपनी तरफ बढ़ते पानी के दबाव को कम करने के लिए बांध के गेट खुलवाना चाहता है, वहीं भारतीय प्रशासन अपनी सीमा के भीतर बाढ़ के खतरे को टालने के लिए पूरी सतर्कता बरत रहा है और स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही कोई कदम उठाएगा।
