कैसे काम करेगी यह नई डिजिटल व्यवस्था?
सफर को आसान बनाने के लिए इस पूरी प्रक्रिया को UDID कार्ड (दिव्यांगजन पहचान पत्र) से जोड़ दिया गया हैI बस परिचालक (कंडक्टर) दिव्यांग यात्री के यूडीआईडी कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को ईटीआईएएम मशीन से स्कैन करेगा। स्कैन होते ही मशीन की स्क्रीन पर यात्री का यूडीआईडी नंबर, नाम, जन्मतिथि, दिव्यांगता का प्रकार, प्रतिशत और आधार संख्या के छिपे हुए अंक दिखाई देने लगेंगे। मशीन दिव्यांगता का प्रतिशत देखकर खुद तय करेगी कि यात्री को कितने निशुल्क टिकट जारी किए जाने हैं।
दिव्यांगता के आधार पर ऐसे मिलेंगे टिकट :
मशीन दिव्यांगता के प्रतिशत के हिसाब से स्वतः ही टिकटों की संख्या निर्धारित करेगी:
40% से 80% दिव्यांगता पर : 1 निशुल्क टिकट जारी होगा। 80% से अधिक दिव्यांगता होने पर: 2 निशुल्क टिकट जारी किए जाएंगे।
इस नई सुविधा के फायदे :
टिकट काउंटर या कंडक्टर के पास कागजी कार्रवाई में समय बर्बाद नहीं होगा। क्यूआर कोड स्कैनिंग से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सही लाभार्थी को ही लाभ मिलेगा। आधार के अंक छिपे होने से यात्रियों की गोपनीयता भी सुरक्षित रहेगी।
यूपी रोडवेज का बड़ा फैसला!
अब दिव्यांग भाई-बहनों को बसों में सफर के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। क्या बदला? अब मैन्युअल पर्ची के बजाय ETIAM मशीन से तुरंत डिजिटल 'शून्य मूल्य' का टिकट मिलेगाI बस सफर के दौरान अपना UDID कार्ड पहचान पत्र कंडक्टर को दिखाना होगा, जिसका QR कोड स्कैन कर तुरंत टिकट जेनरेट हो जाएगा।
