शासन ने लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे रसोइयों के पारिश्रमिक में ₹1000 प्रति माह की वृद्धि को अंतिम मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बजट जारी कर सभी जिलाधिकारियों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
अब हर महीने मिलेंगे ₹3000 : बेसिक शिक्षा महानिदेशालय से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब तक रसोइयों को मिलने वाले ₹2,000 मासिक मानदेय को संशोधित कर ₹3,000 प्रति माह कर दिया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय चालू वित्तीय वर्ष के नियमानुसार सीधे रसोइयों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से ट्रांसफर किया जाएगा। सरकार के इस कदम से राज्य की उन लाखों गरीब और ग्रामीण महिलाओं को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा, जो स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं।
एरियर का भी होगा एकमुश्त भुगतान : विभागीय सूत्रों के मुताबिक, केवल मानदेय में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि पिछले महीनों के बकाया (Arrears) के भुगतान के लिए भी शासन ने बजट आवंटित कर दिया है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि रसोइयों के बैंक खातों का सत्यापन (Verification) कर 10 दिनों के भीतर बढ़े हुए वेतन की अंतर राशि और पुराना बकाया एक साथ उनके खातों में भेज दिया जाए, ताकि त्योहारों के इस सीजन में उन्हें किसी वित्तीय कठिनाई का सामना न करना पड़े।
लापरवाही बरतने वाली कर्माचारियों पर होगी सख्त कार्रवाई : शासन ने अपने आदेश में यह भी साफ़ कर दिया है कि रसोइयों के मानदेय भुगतान में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी ब्लॉक या जनपद स्तर पर बजट उपलब्ध होने के बाद भी रसोइयों के मानदेय को रोका जाता है या भुगतान में हीला-हवाली पाई जाती है, तो संबंधित पटल बाबू और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संगठनों ने जताई खुशी, पर उठाई स्थायीकरण की मांग : उत्तर प्रदेश विद्यालय रसोइया संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के इस फैसले का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि महंगाई के इस दौर में ₹1000 की यह वृद्धि रसोइयों के परिवारों के लिए राहत लेकर आएगी। हालांकि, इसके साथ ही संघ ने रसोइयों को साल में 10 महीने के बजाय पूरे 12 महीने का मानदेय देने, की अपनी पुरानी मांग को भी दोहराया है।
