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यूपी के 4 मेडिकल कॉलेजों की NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया में 91% आरक्षण पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक

✍ Mamta Singh 📅 17 सितंबर 2026 👁 51 बार पढ़ा गया
यूपी के 4 मेडिकल कॉलेजों की NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया में 91% आरक्षण पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक

लखनऊ 16-09-2026 I इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में चल रही NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े एक बड़े विवाद पर बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह विवाद उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर राज्य सरकार द्वारा तय की गई आरक्षण व्यवस्था को लेकर था।

लखनऊ 16-09-2026 I इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में चल रही NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े एक बड़े विवाद पर बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह विवाद उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर राज्य सरकार द्वारा तय की गई आरक्षण व्यवस्था को लेकर था।

 उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के चार विशिष्ट सरकारी मेडिकल कॉलेजों—अम्बेडकर नगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन—में चल रहे 'स्पेशल कंपोनेंट प्लान' (SCP) के तहत इस साल की नीट यूजी काउंसलिंग में सीट मैट्रिक्स जारी किया था। इन कॉलेजों में कुल आरक्षण का दायरा बढ़ाकर लगभग 91% कर दिया गया था, जिससे सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) के मेधावी छात्रों के लिए केवल कुछ ही सीटें बची थीं। अभ्यर्थियों ने इस व्यवस्था को हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क था कि यह आरक्षण का ढांचा उत्तर प्रदेश के वैधानिक आरक्षण अधिनियम, 2006 (जिसमें 50% की सीमा तय है) और पिछले साल अदालत को दिए गए सरकारी आश्वासन के पूरी तरह खिलाफ है।

 हाई कोर्ट के जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की इस आरक्षण व्यवस्था पर सख्त नाराजगी जताई और अदालत ने इन चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू की गई 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से बंद नहीं किया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश के अन्य सामान्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तर्ज पर इन चारों कॉलेजों में भी अनुसूचित जाति (SC) के लिए 21%, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2% और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण के वैधानिक नियमों के आधार पर काउंसलिंग और दाखिले आगे बढ़ाए जाएं।

             अदालत ने साफ किया है कि इस अवधि के दौरान इन कॉलेजों में जो भी दाखिले (Admissions) होंगे, वे इस मामले में आने वाले हाई कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव को आपराधिक अवमानना का नोटिस

इस मामले में सबसे गंभीर रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary) को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पिछले साल (2025 में) इसी तरह के विवाद में राज्य सरकार ने अदालत को लिखित आश्वासन दिया था कि अगले शैक्षणिक सत्र से आरक्षण व्यवस्था को कानूनी नियमों के दायरे में लाया जाएगा। इसके बावजूद सरकार ने दोबारा कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर 91% आरक्षण लागू कर दिया। कोर्ट ने पूछा है कि इस सरकारी वादे और न्यायिक आदेश को तोड़ने के लिए क्यों न उनके खिलाफ अपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट मुख्य पीठ का एक और फैसला

           इसी सप्ताह नीट यूजी काउंसलिंग से जुड़े एक अन्य विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट की मुख्य पीठ (प्रयागराज) के जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की बेंच ने भी एक महत्वपूर्ण आदेश दिया I

          कोर्ट ने मानसिक बीमारी श्रेणी के तहत दिव्यांगता आरक्षण (PwD Quota) से वंचित किए गए एक मेधावी छात्र को राहत दी,  मेडिकल बोर्ड और अपीलीय प्राधिकरण ने छात्र का पुराना और वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र होने के बावजूद काउंसलिंग के समय उसकी दिव्यांगता का प्रतिशत 40% से कम कर दिया था। कोर्ट ने इसे मेडिकल बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए प्राधिकरण के आदेश को रद्द कर दिया और छात्र को दिव्यांग श्रेणी में आरक्षण के तहत सीट का दावा करने की अनुमति प्रदान की

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