मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों में कुल 14.23 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने अपने घरों या दुकानों में बिजली का कनेक्शन लेने के बाद से आज तक विभाग को एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया है। बिजली विभाग की तकनीकी भाषा में इन डिफाल्टरों को 'नेवर पेड कंज्यूमर' (Never Paid Consumers) कहा जाता है। इन उपभोक्ताओं पर वर्तमान में विभाग का कुल 8,148 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व बकाया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर यह रुकी हुई विशाल धनराशि एक साथ मिल जाए, तो लखनऊ, बरेली और अयोध्या जैसे बड़े जिलों की शहरी बिजली व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक और ट्रिपिंग-मुक्त बनाया जा सकता है, जिसके लिए सरकार पिछले 11 सालों से लगातार प्रयास कर रही है।
बरेली और गोंडा के उपभोक्ता सबसे आगे, राजधानी लखनऊ की स्थिति में सुधार
आंकड़ों के मुताबिक, 'नेवर पेड कंज्यूमर' की सूची में टॉप-5 जिलों में क्रमशः बरेली, गोंडा, सुल्तानपुर, शाहजहांपुर और अंबेडकरनगर शामिल हैं। इनमें सबसे खराब स्थिति गोंडा जिले की है, जहां 1.46 लाख उपभोक्ताओं ने कभी बिल नहीं भरा। इसके बाद क्रमशः लखीमपुर खीरी (1.07 लाख) और बरेली (1.12 लाख) का नंबर आता है।
दूसरी ओर, एक राहत भरी खबर राजधानी लखनऊ से है, जहां बिजली विभाग के कड़े रुख के बाद ऐसे डिफाल्टरों की संख्या में भारी कमी आई है। पहले लखनऊ में करीब 20 हजार 'नेवर पेड' उपभोक्ता थे, जो अब घटकर केवल 6,919 रह गए हैं। हालांकि, इन 6,919 उपभोक्ताओं पर अब भी ₹4,947.10 लाख (लगभग 49.4 करोड़ रुपये) का बकाया है।
नेवर पेड उपभोक्ताओं की जिलावार स्थिति (प्रमुख आंकड़े):
|
जिला |
डिफाल्टरों की संख्या |
कुल बकाया (लाख ₹ में) |
|
गोंडा |
1,46,327 |
86,409.44 |
|
बरेली |
1,12,933 |
85,149.83 |
|
लखीमपुर |
1,07,582 |
53,588.44 |
|
शाहजहांपुर |
99,146 |
62,375.35 |
|
सीतापुर |
98,088 |
46,696.97 |
|
सुल्तानपुर |
96,970 |
73,141.52 |
|
हरदोई |
93,509 |
45,313.13 |
|
बहराइच |
85,520 |
38,114.43 |
|
बदायूं |
85,348 |
45,759.83 |
|
अंबेडकरनगर |
83,851 |
57,169.78 |
|
अयोध्या |
60,877 |
29,982.04 |
|
लखनऊ |
6,919 |
4,947.10 |
राजस्व वसूली में फिसड्डी साबित हो रहे कई बड़े अफसर
विभागीय सूत्रों के अनुसार, लखीमपुर, सीतापुर, सुल्तानपुर और हरदोई जैसे जिलों में तैनात मुख्य अभियंताओं से लेकर अधिशासी अभियंताओं तक की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ये अधिकारी इन बकायेदारों से राजस्व वसूलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (वाणिज्य) ने बताया कि विभाग इन उपभोक्ताओं को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार ओटीएस (एकमुश्त समाधान योजना) का लाभ दे रहा है। कुछ उपभोक्ता इस योजना का लाभ उठाकर नियमित बिल भरने भी लगे हैं। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में इन 'नेवर पेड' उपभोक्ताओं का आंकड़ा शून्य के करीब लाया जा सके।
