11 लोगों की मौत और भारी तबाही
इस दर्दनाक विस्फोट में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें दुर्भाग्यवश 8 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा कई लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं, जिनका इलाज प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। विस्फोट की भयावहता के कारण फैक्ट्री पूरी तरह जमींदोज हो गई। इसके साथ ही लगे हुए करीब 5 से 7 आवासीय मकान पूरी तरह से ढह गए और मलबे में तब्दील हो गए। घटना का असर पास से गुजरने वाले दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग की ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन पर पड़ा, जिसके चलते वंदे भारत और सियालदह एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का संचालन करीब डेढ़ घंटे ठप रहा।
प्रशासन का सख्त 'बुलडोजर' एक्शन और पुलिस पर गाज
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पटाखा निर्माण इकाई का लाइसेंस साल 2024 में ही निरस्त किया जा चुका था, जिसके बावजूद इसे अवैध रूप से चलाया जा रहा था। घटना के तुरंत बाद यूपी प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए मुख्य आरोपी 'मोहम्मद आदिल' के अवैध पटाखा गोदाम को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। अवैध संचालन की सूचना उच्चाधिकारियों को न देने और लापरवाही बरतने के आरोप में पिपरी थाना प्रभारी समेत 5 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर और सस्पेंड कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
