बड़े फैसले के मुख्य बिंदु
अकेले चुनाव लड़ने का एलान : मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब की आगामी चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने एक बार फिर साफ किया कि बसपा किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी।
अशोक सिद्धार्थ और आकाश पर बड़ा खुलासा : मायावती ने बैठक में आकाश आनंद और उनके ससुर (पूर्व सांसद) अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से पूरी तरह बाहर करने (निष्कासित करने) के फैसले की वजह बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये लोग समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के संपर्क में थे और बसपा को तोड़ने का षड्यंत्र रच रहे थे।
सपा का 'डिप्टी सीएम' ऑफर : सूत्रों के अनुसार, मायावती ने सपा के प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव का नाम लेते हुए कहा कि अशोक सिद्धार्थ उनसे मिले थे। सपा में शामिल होने पर आकाश आनंद को सरकार बनने की स्थिति में डिप्टी सीएम बनाने का लालच दिया गया था।
परिवारवाद पर मायावती का रुख : मायावती ने कहा कि वह बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के सिद्धांतों पर चलते हुए हमेशा परिवारवाद से दूर रही हैं। लेकिन यदि उनके सगे-संबंधी बिना किसी लोभ या पद के लालच में निस्वार्थ भाव से काम करना चाहते हैं, तो वे संगठन में योगदान दे सकते हैं। इसी निस्वार्थ भावना को देखते हुए उन्होंने ईशान आनंद को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
ईशान की भूमिका : नए राष्ट्रीय संयोजक ईशान आनंद फिलहाल पार्टी की अंदरूनी बैठकों में शामिल रहेंगे, लेकिन अभी वे पब्लिक मीटिंग (जनसभाएं) नहीं करेंगे।
मायावती का सपा और कांग्रेस पर षड्यंत्र का आरोप :
रिपोर्ट के अनुसार, सपा (समाजवादी पार्टी) और कांग्रेस के कथित षड्यंत्र को लेकर मायावती ने बैठक में कई गंभीर और बड़े खुलासे किए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
बसपा को तोड़ने की साजिश का आरोप : मायावती ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि बसपा के कुछ बड़े नेता विपक्षी दलों, विशेषकर सपा और कांग्रेस के लगातार संपर्क में थे। वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर बसपा की छवि खराब करने और संगठन को अंदर से कमजोर कर तोड़ने का एक बड़ा षड्यंत्र (साजिश) रच रहे थे।
आकाश आनंद के ससुर (अशोक सिद्धार्थ) की भूमिका : मायावती ने बैठक में स्पष्ट किया कि आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की सबसे बड़ी वजह यही थी। मायावती का आरोप है कि अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह से सपा-कांग्रेस के प्रभाव में काम कर रहे थे।
· प्रो. रामगोपाल यादव से सीक्रेट मीटिंग : सूत्रों के हवाले से खबर में बताया गया है कि मायावती ने बकायदा समाजवादी पार्टी के प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव का नाम लेते हुए गंभीर दावा किया। उन्होंने कहा कि अशोक सिद्धार्थ चोरी-छिपे रामगोपाल यादव से मिले थे और वहीं पर बसपा के खिलाफ पूरी रूपरेखा तैयार की जा रही थी।
· आकाश आनंद को 'डिप्टी सीएम' का लालच : इस पूरे कथित षड्यंत्र का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा 'डिप्टी सीएम' (उपमुख्यमंत्री) का ऑफर था। मायावती के अनुसार, समाजवादी पार्टी की तरफ से यह लालच दिया गया था कि यदि आकाश आनंद और उनके समर्थक बसपा छोड़कर सपा में शामिल हो जाते हैं, तो उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर आकाश आनंद को डिप्टी सीएम का पद दिया जाएगा।
