कोर्ट ने 9 नवंबर 2023 (तदर्थ शिक्षकों को हटाने) और 8 जुलाई 2024 (कम मानदेय पर भर्ती) के शासनादेशों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब पद स्वीकृत है और काम समान है, तो टीजीटी (25k) और पीजीटी (30k) को बेहद कम मानदेय देना अनुचित है। उन्होंने सरकार की नीति को 'अपरोबेट एंड रीप्रोबेट' (एक साथ हां और ना कहना) के सिद्धांत के विपरीत बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक नियमित भर्ती नहीं होती, अस्थाई नियुक्तियां की जा सकती हैं, लेकिन उन्हें पद का न्यूनतम वेतनमान और भत्ते देने होंगे। इस फैसले से एडेड स्कूलों में कम मानदेय पर शिक्षकों को रखने की प्रथा पर रोक लगेगी और उन्हें सम्मानजनक वेतन मिल सकेगा।
