· स्टॉक की अधिकतम सीमा: कोई भी डीलर एक समय में किसी भी स्थान पर 400 टन (4,000 क्विंटल) से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकता।
· भंडारण की समय सीमा : डीलरों को चीनी का स्टॉक मिलने की तारीख से 30 दिनों के भीतर उसकी बिक्री (टर्नओवर) सुनिश्चित करनी होगी।
· एस्मा (ESMA) के तहत कार्रवाई : नियमों का उल्लंघन करने वाले, जमाखोरी करने वाले और बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा करने वालों पर एस्मा के तहत FIR और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
· सख्त भौतिक सत्यापन : सभी जिलाधिकारियों (DMs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों में चीनी मिलों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के गोदामों की भौतिक जांच (Physical Verification) करवाएं।
यूपी में चीनी का वर्तमान स्टॉक - मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि वे चीनी की कमी की अफवाहों से बचें, क्योंकि उत्तर प्रदेश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है:
· कुल उपलब्ध स्टॉक: राज्य की चीनी मिलों में इस समय 179.38 लाख क्विंटल चीनी उपलब्ध है।
· सहकारी चीनी मिलें: 23.60 लाख क्विंटल।
· निगम चीनी मिलें: 5.28 लाख क्विंटल।
· निजी चीनी मिलें: 150.50 लाख क्विंटल।
· यूपी की मासिक खपत: उत्तर प्रदेश में चीनी की अनुमानित मासिक खपत लगभग 4 लाख टन है।
गन्ना किसानों का रिकॉर्ड भुगतान और नया सत्र -
· रिकॉर्ड भुगतान: समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य के 48 लाख गन्ना किसानों को ₹3,217 करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है।
· नया पेराई सत्र: उत्तर प्रदेश में गन्ने का नया पेराई सीजन आगामी 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा
कीमतें बढ़ने की मुख्य वजहें -
केंद्र और राज्य सरकार के अनुसार, हाल ही में खुदरा बाजार में चीनी के दाम जो लगभग ₹48 से बढ़कर ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, उसके पीछे मुख्य कारण हैं : त्योहारों से पहले बढ़ी मांग. मौसम और बीमारियों (जैसे रेड रॉट) के कारण घरेलू उत्पादन में आई गिरावट।
3. कुछ व्यापारियों द्वारा की जा रही सट्टेबाजी और मुनाफाखोरी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन नहीं है, क्योंकि इसका हिस्सा पहले से घटा है। इसके अलावा आपूर्ति सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्चे चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को भी मंजूरी दी है।

Good