यह पूरी कार्रवाई 'जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स' कंपनी और लोहा उद्योग से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की गई है। आरोपियों पर जाली दस्तावेजों और फर्जी इनवॉइस (बिलों) के जरिए करीब ₹9.63 करोड़ से ₹10.28 करोड़ तक का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने और बड़े पैमाने पर जीएसटी (GST) चोरी करने का आरोप है।
'न्यू राणा हाउस' बना छापेमारी का मुख्य केंद्र
सोमवार सुबह करीब 8 बजे ईडी के अधिकारी सुरक्षा के लिहाज से अपनी गाड़ियों पर 'बोल बम' के स्टिकर लगाकर मुजफ्फरनगर स्थित चर्चित 'राणा हाउस' पहुंचे। छापेमारी के दौरान स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के लगभग 50 जवानों ने पूरे परिसर को अपने घेरे में ले लिया, जिससे हड़कंप मच गया। इस दौरान किसी को भी अंदर या बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई। मेरठ रोड स्थित इस 'राणा हाउस' में शाहनवाज राणा के अलावा उनके चाचा और पूर्व सांसद कादिर राणा, और भाई व पूर्व विधायक नूर सलीम राणा उर्फ पप्पू राणा भी रहते हैं। ईडी ने इन सभी से जुड़े परिसरों और उनके द्वारा संचालित अखबार 'शाह टाइम्स' के दफ्तर को भी खंगाला। मुजफ्फरनगर में राना परिवार के अलावा प्रमुख लोहा उद्यमी संजय जैन और सुधा स्टील के परिसरों पर भी जांच टीमों ने दबिश दी।
पुराना विवाद : जीएसटी टीम पर हमला
शाहनवाज राणा और उनका परिवार पिछले दो साल से जांच एजेंसियों के रडार पर है। इससे पहले, दिसंबर 2024 में राणा स्टील फैक्ट्री पर छापा मारने गई वाणिज्य कर (GST) की टीम पर हमला करने, गाड़ियां तोड़ने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में शाहनवाज राणा को गिरफ्तार कर चित्रकूट जेल भेजा गया था। इस मामले में बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी में जब्त किए गए वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की विस्तार से स्क्रूटनी की जा रही है, जिसके आधार पर जल्द ही राणा और उनके सहयोगियों को पूछताछ के लिए समन जारी किया जाएगा।
