पुलिस का दावा है कि विनीत की हत्यारोपी बहू को घर खर्च के लिए 10 हजार और बेटे सुब्रत को 35 हजार रुपये वेतन देते थे। सवाल यह है कि इस मामूली रकम में कोई छह लाख की सुपारी कैसे दे सकता है। वहीं, पुलिस साजिश में बेटे सुब्रत का हाथ भी मान रही है। जेल भेजी गई हत्यारोपी बहू शालू के परिजन भी पुलिस के दावे से असहमत दिखे और पुलिस से शालू को छोड़ देने के लिए कहते रहे। वहीं, हत्यारोपी शालू ने पूछताछ में अपना जुर्म भी नहीं स्वीकार किया। बल्कि वह यही कहती रही कि पापा तो बहुत अच्छे थे। उन्हें इतनी बेरहमी से विशाल ने क्यों मार दिया।
पुलिस ने बताया कि जन्माष्टमी के आसपास सुब्रत और शालू शॉपिंग के लिए विशाल को विनीत से छिपाकर अपने साथ ले गए थे। तीनों पहले कार से परेड गए और वहां खरीदारी की। सुब्रत गाड़ी में ही बैठे रहे। तीनों गुमटी नंबर पांच पहुंचे। शालू ने फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बनवाकर विशाल को सौंपी। सोमवार को थाने में शालू और विशाल का आमना सामना हुआ तो विशाल ने सुपारी देने व चाभी बनवाने की बात कही। इस पर शालू एकटक सिर्फ उसकी बातें सुनती रही। पुलिस का कहना है कि कुछ समय पहले कारोबारी विनीत की मां घर आई थी। विनीत ने घर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इससे लगता है कि विनीत को अनहोनी की आशंका थी। शालू के मुताबिक उसे कैमरों से परेशानी होती थी। अक्सर वह कैमरे बंद कर दिया करती थी।
