उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का गठन और नया ढांचा
सरकार ने निजी एजेंसियों और बिचौलियों के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए इस विशेष निगम का गठन किया है। कैबिनेट ने निगम के सुचारू संचालन और प्रशासनिक खर्चों के लिए शून्य ब्याज दर पर ₹20 करोड़ का शुरुआती फंड जारी किया है। अब कोई भी सरकारी विभाग सीधे किसी निजी वेंडर या मैनपावर एजेंसी से कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर सकेगा। सभी विभागों को अपनी जरूरत इस निगम को भेजनी होगी, जो GeM पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से अधिकृत एजेंसियों का चयन करेगा, व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने बजट में ₹426 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जिससे कुल बजट बढ़कर ₹2,223.84 करोड़ हो गया है।
मानदेय में ₹11,000 तक की बंपर बढ़ोतरी और न्यूनतम वेतन तय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय में ₹8,000 से लेकर ₹11,000 तक की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। सरकार ने अब आउटसोर्स कर्मचारियों का न्यूनतम मानदेय ₹16,000 से ₹20,000 प्रति माह के बीच तय कर दिया है।इसके अतिरिक्त, हालिया फैसले के तहत परिवहन निगम (UPSRTC) में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर, अकाउंटेंट और प्रोग्रामर के मानदेय में भी 5% की अलग से वृद्धि लागू कर दी गई है।
देश में पहली बार संविदा नौकरियों में आरक्षण नीति लागू
योगी सरकार ने एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए आउटसोर्सिंग और संविदा की नौकरियों में भी प्रदेश की आरक्षण नीति को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब इन पदों पर भर्ती के दौरान निम्नलिखित श्रेणियों को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है:
- · अनुसूचित जाति (SC): 21%
- · अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 27%
- · अनुसूचित जनजाति (ST): 2%
- · आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 10%
- · दिव्यांगजनों, पूर्व सैनिकों और महिलाओं के लिए निर्धारित क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण भी रहेगा।
ठेकेदार बदलने पर भी नहीं जाएगी नौकरी
कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता 'जॉब सिक्योरिटी' को लेकर होती थी। सरकार ने नया नियम बनाकर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया है, यदि किसी विभाग का ठेका या मैनपावर एजेंसी बदलती है, तो भी वहां पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। उनकी सेवा निरंतर (बाधित नहीं) मानी जाएगी और नई एजेंसी को उनका कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू करना होगा।
सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अनिवार्य
अब कोई भी निजी एजेंसी अपनी मर्जी से किसी कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त नहीं कर सकती। इसके लिए संबंधित सरकारी विभाग के सक्षम अधिकारी की लिखित सिफारिश या अनुमति अनिवार्य होगी।
सीधे बैंक खाते में भुगतान और सामाजिक सुरक्षा के कड़े नियम
वेतन में होने वाली अवैध कटौती और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए अब पूरा भुगतान Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए किया जाएगा।
1 से 5 तारीख के बीच वेतन: सभी कर्मचारियों का मानदेय हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
PF और ESI का लाभ: सभी आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए कर्मचारियों को 13% EPF और 3.25% ESI का लाभ देना अनिवार्य कर दिया गया है।
मातृत्व अवकाश: संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को भी अब नियमानुसार मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) की सुविधा मिलेगी।
आकस्मिक सहायता - ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु होने पर उनके परिवार को तत्काल ₹15,000 की अंत्येष्टि सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा सभी कर्मचारियों को मेडिकल कवर, एक्सीडेंटल इंश्योरेंस और सरकार की तरफ से कौशल विकास (Skill Training) की ट्रेनिंग दी जाएगी।
सरकार के इन फैसलों से उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा मिली है। इसे राज्य के प्रशासनिक सुधारों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

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