नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़े कानूनी मामले में बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) अर्जित करने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले से जुड़ी कोई भी जांच या स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल न करने का सख्त आदेश दिया है।
कोर्ट ने पूछा– 'मामला गंभीर था तो एजेंसियां अब तक चुप क्यों थीं?'
सुनवाई के दौरान तीन न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमालया बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। जांच एजेंसियों की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने जब इन आरोपों को 'बेहद गंभीर' बताया, तो जस्टिस जोयमालया बागची ने उन्हें टोकते हुए पूछा, "यदि मामला इतना ही गंभीर था, तो आपकी एजेंसी अब तक चुप क्यों बैठी थी? क्या आपको कार्रवाई करने के लिए कोर्ट के आदेश या प्रेरणा की जरूरत है? क्या आपने इस पर खुद (Suo Motu) संज्ञान लेकर कोई एक्शन लिया? नहीं ना?"
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही जांच एजेंसियों के पास प्रथम दृष्टया सामग्री होने पर किसी के भी खिलाफ मामला दर्ज करने की वैधानिक शक्तियां हैं, लेकिन जब अदालतें किसी जांच के लिए निर्देश जारी करती हैं, तो कम से कम अदालतों से यह उम्मीद की जाती है कि वे 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) का पालन करें और प्रभावित पक्ष का पक्ष भी सुनें।
क्या है पूरा मामला?
पूरा विवाद कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी के पास उनकी घोषित आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति है, जिसकी जांच होनी चाहिए।
इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूर्व में बंद कमरे (In-Chamber) की सुनवाई के दौरान मामले के रिकॉर्ड को सीलबंद लिफाफे में रखने को कहा था। पिछले महीने हाई कोर्ट ने सीबीआई द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष व्यक्त करते हुए सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया था और ED को भी आगे बढ़ने की छूट दी थी। हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त तय की थी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मूल शिकायतकर्ता एस. विग्नेश शिशिर, सीबीआई और ईडी को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि राहुल गांधी की याचिका की प्रति शिकायतकर्ता को मुहैया कराई जाए ताकि अगली सुनवाई पर उनका पक्ष भी सुना जा सके। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को आदेश दिया है कि वह इस मामले में अपनी अगली सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दे। इस फैसले के बाद विपक्षी खेमे और कांग्रेस पार्टी ने राहत की सांस ली है।

bilkul sahi farmaya dixit ji aapne